माथे को चूम लूँ मैं,
और उनकी जुल्फ़े बिखर जाये,
इन लम्हों के इंतजार में,
कहीं जिंदगी न गुज़र जाये.
माथे को चूम लूँ मैं,
और उनकी जुल्फ़े बिखर जाये,
इन लम्हों के इंतजार में,
कहीं जिंदगी न गुज़र जाये.
Mathe ko choom lun main,
Aur unki zulfein bikhar jaye,
In lamhon ke intezaar mein,
Kahin zindagi na guzar jaye.
