मोह खत्म होते ही खोने का डर भी निकल जाता है,
चाहे दौलत हो, वस्तु हो, रिश्ता हो, या फिर जिंदगी.
मोह खत्म होते ही खोने का डर भी निकल जाता है,
चाहे दौलत हो, वस्तु हो, रिश्ता हो, या फिर जिंदगी.
Moh Khatm Hote Hi Khone Ka Dar Nikal Jata Hai,
Chahe Daulat Ho, Vastu Ho, Rishta Ho, Ya Phir Zindagi.
